Friday, November 6, 2009

उडो,की ये वक्त है उड़ने का

वक्त से कोई गिला ना रहे ,
जिन्दगी से कोई सिला ना रहे !

उडो,की ये वक्त है उड़ने का ,
क्या पता कल आकाश का रंग नीला न रहे !

रात भर क्यों जागो क्या पता ,
कल सूरज ही निकला न रहे !

आज रंग मे हो गोरी ,
क्या पता ,कल वो रंगीला ना रहे !

मधुकर(मधु)

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