Sunday, July 24, 2011

कड़ी पर कड़ी लगायी जा रही है


बरसो बनकर रहा हमसफ़र ''मधुर''




और आज फिर




मेरे पैरो पर




घडी लगायी जा रही है .....!




जब सावन आया तो मुझे




प्यासा रखा ,




जलिसे जर दोस्त पर




पैसो की झड़ी लगायी जा रही है ...!




आग लगी है ,




दिल -ए -शहर जलेगा ,




यु ही बेवजह




कड़ी पे कड़ी लगायी जा रही है ........!




शहर जनता है हुनर ,




हमारें ''मधुर'' हाथो का ।




देखते है कैसे मख लिश को




हथकड़ी लगायी जा रही है ..........!







मधुकर ''मधुर''




जलिसे =मख्खन बाज ,जर दोस्त = आस पास बैठने वाले


मख लिश = बिरोध करने वाला




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