Friday, November 6, 2009

.............मेरा दर्द ..............

लोग प्यासे को पानी देते नहीं ,
सागर मे हाँथ डुबो देते है .......!
बहुत कुछ पाने छाह में
अपनाअस्तित्व ही खो देते है ........!

एक हम है " मधुर " दूसरो
की खुशियों के लिए जलते है ,
और देख कर
गम औरों का रो देते है .......!

तिलिश्म देखिये हमारे हाथो का
काँटों से कुरेदते है
अपने ही जिस्म को
और ख़ुशी मिली अगर
कही और बो देते है ...........!
(मधुर )

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